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बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के मरीज हैं, तो जान लीजिठकिस समय चेक करना चाहिठबीपी, कब खानी चाहिठगोली
हाई बीपी से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ लोगों को किसी à¤à¥€ समय बीपी नहीं लेना चाहिà¤à¥¤ इससे गलत रीडिंग की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। विशेषजà¥à¤ž कहते हैं कि सटीक रीडिंग के लिठदिन के समय बीपी लेना सबसे अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है।
कà¥à¤¯à¤¾ आपको हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की शिकायत है। अगर हां, तो जाहिर सी बात है कि आप हर दिन अपना बीपी चेक करते होंगे। वैसे बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को हर दिन लेना आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की देखरेख करने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है। खासतौर से यदि आप घर पर बीपी चेक कर रहे हैं, तो रिजलà¥à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¤•दम सटीक होने चाहिà¤à¥¤ à¤à¤• सटीक रीडिंग लेने के अचà¥à¤›à¥‡ तरीकों में से à¤à¤• है हर दिन à¤à¤• ही समय पर बीपी चेक करना। कई लोग दिन के किसी à¤à¥€ समय बीपी मापने बैठजाते हैं। पर हो सकता है à¤à¤¸à¤¾ करने से परिणाम गलत आà¤à¤‚। विशेषजà¥à¤ž कहते हैं कि दिन का समय बीपी की जांच करने के लिठसबसे अचà¥à¤›à¤¾ है। रोजाना à¤à¤• ही समय पर जांच करने से आपको सही रिजलà¥à¤Ÿà¥à¤¸ मिलेंगे। आज वरà¥à¤²à¥à¤¡ हाइपरटेंशन डे (World Hypertension Day) के मौके पर जानते हैं कि अपने हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की जांच कब और कैसे करनी चाहिà¤?
​बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कब जांचना चाहिà¤
बता दें कि बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° दिनà¤à¤° बदलता रहता है। आमतौर पर जब सà¥à¤¬à¤¹ आप जागते हैं, ये सबसे कम होगा और दिनà¤à¤° काम करने के दौरान ये बढ़ा हà¥à¤† रहेगा। चूंकि बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° में दिनà¤à¤° बदलाव होता है, à¤à¤¸à¥‡ में दिन में कम से कम दो बार इसे लेना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है। इसके लिठआप à¤à¤¸à¤¾ समय चà¥à¤¨à¥‡à¤‚, जब आप घर पर हों।
​रीडिंग को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाले कारक
जागते ही रीडिंग लेना-
जागने के तà¥à¤°à¤‚त बाद बीपी चेक करना अचà¥à¤›à¤¾ नहीं माना जाता। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस समय ये सबसे कम रीडिंग देगा। à¤à¤¸à¥‡ में आपकी चिंता बढ़ सकती है। इससे अचà¥à¤›à¤¾ है कि जागने के आधे से à¤à¤• घंटे बाद अपना बीपी चेक करें।
चाय के बाद बीपी चेक करना
कई लोग चाय या कॉफी पीने के बाद बीपी लेते हैं, लेकिन इससे गलत रीडिंग की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। आदरà¥à¤¶ रूप से सà¥à¤¬à¤¹ का बीपी बà¥à¤°à¤¶ करने और सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने के बाद लें। कà¥à¤² मिलाकर सà¥à¤¬à¤¹ की चाय या बà¥à¤°à¥‡à¤•फासà¥à¤Ÿ से पहले ही à¤à¤¸à¤¾ करने की कोशिश करें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि चाय और à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही नहीं, बलà¥à¤•ि रोजमरà¥à¤°à¤¾ की à¤à¤¸à¥€ कई चीजें हैं, जो आपका बीपी बढ़ाती हैं।
​टॉयलेट जाने से पहले
कई लोग टॉयलेट जाने से पहले बीपी मापते हैं। लेकिन सही परिणामों के लिठटॉयलेट जाने के बाद बीपी लेना à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है। अगर आप बीपी लेने का कोई फिकà¥à¤¸ टाइम सेट नहीं कर पा रहे तो कोई बात नहीं। लेकिन रीडिंग लेने के आधे घंटे पहले सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग न करें, à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करने से बचें और शराब का सेवन तो बिलà¥à¤•à¥à¤² न करें।
​सटीक रीडिंग के लिठकà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤-
रीडिंग लेने से पहले 5 मिनट रिलेकà¥à¤¸ हो जाà¤à¤‚।
जिस कमरे में रीडिंग ले रहे हैं, वह ना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंडा हो और ना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤® हो।
बिसà¥à¤¤à¤° पर बैठे -बैठे रीडिंग ना लें। पैरों को फरà¥à¤¶ पर सपाट कर के बैठें।
माप के लिठजिस हाथ का उपयोग कर रहे हैं उसे टेबल पर रखें।
बीपी लेते समय अपनी सà¥à¤²à¥€à¤µà¥à¤¸ ऊपर करें।
देखें कि बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कफ सही ढंग से रखा गया है या नहीं।
माप लेते समय बातचीत ना करें। इससे रीडिंग में अंतर बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ आता है।
लगà¤à¤— तीन मिनट बाद फिर से बीपी लेना à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ तरीका हो सकता है। दरअसल, à¤à¤¸à¤¾ करने से यह जानने में मदद मिलेगी कि आपका बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° सही था। यदि दोनों रीडिंग के बीच बड़ा अंतर है, तो तीसरी बार फिर से रीडिंग लें और हर रीडिंग को रिकॉरà¥à¤¡ करें।
​जानिठकà¥à¤¯à¤¾ हैं à¤à¤• हेलà¥à¤¦à¥€ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° रीडिंग
120/80 से 129/80 mm Hg-
अगर पारा इस रीडिंग पर है, तो यह रीडिंग सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ मानी जाती है।
130/80 से 139/89 mm Hg के बीच-
इस शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में रीडिंग को हाई माना जाता है। जिसे पà¥à¤°à¥€-हाइपरटेंशन कहते हैं। इस रीडिंग को सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 1 हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° माना जाता है। यदि लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में बदलाव के बाद à¤à¥€ रीडिंग में सà¥à¤§à¤¾à¤° न हो, तो आपको हाई बीपी की दवा लेनी शà¥à¤°à¥‚ करना पड़ सकती है।
140-90 से 179-119 mm Hg -
इसे सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ -2 हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° माना जाता है, जो और à¤à¥€ गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का संकेत है। इसमें आपको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दवाà¤à¤‚ दी जा सकती हैं।
180/120 mm Hg या इससे अधिक-
इस रेंज तक बीपी बढ़ना à¤à¤• इमरजेंसी कंडीशन है। इससे शरीर का कोई ऑरà¥à¤—न à¤à¥€ फेल हो सकता है। यदि आपको à¤à¤¸à¥€ रीडिंग मिले, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚।
​हेलà¥à¤¦à¥€ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के टिपà¥à¤¸
सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, साबà¥à¤¤ अनाज और लीन पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहार का पालन करें।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चीनी और नमक हाई बीपी वालों के लिठजहर है। इससे बचें।
वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करें और धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ छोड़ दें।
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लेवल कम करें और अचà¥à¤›à¥€ नींद लें।
हर दिन बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° चेक करने से पहले खाने, पीने या वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से बचे रहें। बीपी को हर दिन रिकॉरà¥à¤¡ करें और किसी à¤à¥€ बदलाव के बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° को बताà¤à¤‚। खासतौर से अगर बीपी बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो तो।
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